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मेहनत का फल

 **मेहनत का फल**मेहनत का फल

एक समय की बात है। हरे-भरे खेतों और शांत वातावरण वाला एक सुंदर सा गाँव था। इस गाँव में दो दोस्त रहते थे—मोहान और सोहन। दोनों बचपन से ही साथ खेलते, साथ पढ़ते और साथ घूमते-फिरते थे। लेकिन एक बात में दोनों में बहुत अंतर था—**मोहान बहुत मेहनती था**, जबकि **सोहन आलसी और टाल-मटोल करने वाला** था।

### **मोहान की आदत**

मोहान सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता। वह अपने माता-पिता के साथ खेतों में काम करता, जानवरों को चारा डालता और अपने घर का छोटा-मोटा काम भी करता। स्कूल से लौटने के बाद भी वह या तो पढ़ाई में मन लगाता या फिर खेत में माता-पिता की मदद करता। उसके मन में हमेशा एक बात रहती—*”अगर आज मेहनत करेंगे, तो कल उसका फल जरूर मिलेगा।”*

### **सोहन की आदत**

सोहन की कहानी बिल्कुल उलटी थी। वह सुबह देर तक सोता रहता, स्कूल में भी पढ़ाई में मन नहीं लगाता और ज्यादातर समय खेल-कूद या दोस्तों के साथ इधर-उधर घूमने में बर्बाद कर देता। जब उसके माता-पिता कहते कि बेटा, थोड़ा खेत में मदद कर दो, तो वह कह देता—*”अभी तो बहुत समय है, बाद में कर लूँगा।”*

### **मौसम का बदलाव**

गाँव में बारिश का मौसम आने वाला था। इस मौसम में किसान धान और सब्ज़ियों की खेती के लिए खेत तैयार करते थे। मोहान ने समय रहते अपने खेतों की जुताई कर ली, बीज बो दिए और पौधों की देखभाल शुरू कर दी। वह हर दिन पौधों को पानी देता, खर-पतवार निकालता और कीड़ों से बचाने के लिए प्राकृतिक दवा छिड़कता।

सोहन ने सोचा—*”मौसम तो लंबा है, मैं बाद में कर लूँगा।”* वह अपने खेत को जैसे-तैसे जोतता, लेकिन समय पर बीज नहीं बो पाया। जब बारिश ज्यादा हो गई, तो उसका खेत पानी से भर गया और बीज डालने का सही समय निकल गया।

### **परिश्रम का परिणाम**

कुछ महीने बाद, मोहान के खेत में हरी-भरी फसल लहराने लगी। पौधे मजबूत थे और उनमें अच्छे दाने भी आए। पूरे गाँव में लोग उसकी तारीफ करने लगे—*”देखो, मोहान ने कितनी मेहनत की है, तभी उसकी फसल इतनी अच्छी हुई है।”*

सोहन के खेत में न तो फसल ठीक से उगी और न ही जो उगी, उसमें अच्छे दाने आए। वह उदास होकर मोहान के खेत को देखता और सोचता—*”काश मैंने भी समय पर मेहनत की होती।”*

### **मोहान की मदद**

मोहान ने अपनी मेहनत से न केवल अपने परिवार के लिए अनाज जुटाया, बल्कि अतिरिक्त अनाज बेचकर कुछ पैसे भी कमाए। उन पैसों से उसने घर की मरम्मत करवाई और पढ़ाई के लिए नई किताबें खरीदीं। उसने सोहन से कहा—
*”देखो दोस्त, मेहनत का फल मीठा होता है। अगर तुम भी शुरू से मेहनत करते, तो तुम्हारे पास भी अच्छी फसल होती।”*

सोहन ने अपनी गलती मान ली और वादा किया कि अगली बार वह भी समय पर मेहनत करेगा।

### **सीख**

उस दिन से सोहन ने आलस्य छोड़कर मेहनत करना शुरू किया। अगले साल, दोनों दोस्तों के खेत में अच्छी फसल आई और दोनों ने साथ मिलकर खुशी मनाई।

**नैतिक शिक्षा:** *”मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। समय पर किया गया परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।”* इस तरह मोहान और सोहन  ने सफलता पा ली और खुशि खुशि रहने लगे।

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अगली कहानी **”सच्चाई की जीत“**

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